शनिवार, 8 अगस्त 2026

और सपने थे बिखरने

झर रहा बारिश का मौसम 
कर रहे श्रृंगार झरने 
चल पड़े बादल यहा पे 
सिंधु से जल को है भरने
 न रही मासूम कलियां 
जब रहा संसार छलिया
 रह गई केवल घटाए 
और सपने  थे बिखरने

2 टिप्‍पणियां:


  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 12 अगस्त 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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