बुधवार, 12 अगस्त 2026

अर्चना संगीत लय में

वो नही संशय मे  भय में 
रहता  वो  तो  हृदय में 

वो तिमिर को दीप देता
 है समीर का वो प्रणेता 
प्राची मे उषा रहा  है 
वो रहा सृजन प्रलय में

धैर्य को खोता नही  है 
वो कभी सोता नही  है 
बह रहा है वह समय में
और प्राची में रहता उदय में

वो  कोई  गिनती  नहीं  है  
वो  कोई  विनती  नहीं  है 
वो  रहा  पुरुषार्थ  कर्म 
अर्चना  संगीत लय  में 

चाहता  उसको  धरू में 
जाप कर  उस  पर  मरू  में 
बारिशों  में  बूँद  जैसा 
वो  कामना  में  न  विषय  में 


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अर्चना संगीत लय में

वो नही संशय मे  भय में  रहता  वो  तो  हृदय में  वो तिमिर को दीप देता  है समीर का वो प्रणेता  प्राची मे उषा रहा  है  वो रहा सृजन प्रलय में धै...