सोमवार, 13 जुलाई 2026

भाव है संवेदना है

मूर्तियां  पत्थर  नहीं  है  
मूर्तियों  में  चेतना  है 
मूर्तियां  हैं  प्राण  वाहक 
सन्देश  ईश को  भेजना  है
शिल्पियों  की  ये  कहानी 
मूर्तियाँ  होती  पुरानी 
 मूर्तियां  सृजन  की  पूजन 
भाव  है  संवेदना  है 
मूर्तियां  जगती  रही  है 
मूर्तियां  सोती  रही  है 
मूर्त  होती कल्पना  तो 
सृजना की  वेदना  है 
मूर्तियाँ  कोमल  रही  है 
मूर्तियां  हलचल  रही  है 
मूर्तियां  दिखती  दिवारें 
मूर्तियां  निश्चल  रही  है 
मूर्तियां  से  बात  करके 
लक्ष्य  पावन  भेदना  है 

1 टिप्पणी:

  1. सुंदर सृजन!! रूप के पीछे छिपे अरूप को जो देख लेता है, मूर्तियाँ उसके लिए सजीव हो जाती हैं

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