चलो तुम आगे यहां डरना मना है
लगे फूल प्यारे और पत्ते जो सारे
हरा है अभी तक ये मोटा तना है
यहां से हम जायेगे कितना भी आगे
पीछे पीछे हम थे चला लक्ष्य आगे
पसीना ये चाहे कितना बहा है
जटिलता रही है उलझे और धागे
इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की अमर धरोहर मालवा की धरती केवल कृषि, व्यापार और वीरता की भूमि नहीं रही, बल्कि यह भारत की उन प्राचीन सा...
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