चलो तुम आगे यहां डरना मना है
लगे फूल प्यारे और पत्ते जो सारे
हरा है अभी तक ये मोटा तना है
यहां से हम जायेगे कितना भी आगे
पीछे पीछे हम थे चला लक्ष्य आगे
पसीना ये चाहे कितना बहा है
जटिलता रही है उलझे और धागे
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
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