आपकी ये पंक्तियाँ पढ़कर मन में तुरंत उम्मीद की भावना जागती है। आपने अंधेरे के बाद उजाले की बात बहुत सुंदर तरीके से कही। मुझे ऐसा लगा जैसे आप मुश्किल समय में भी हौसला बनाए रखने की बात कर रहे हैं।
अब भाव नही होते दर्पण जो आँखो से दिख जाते है न रही चेतना चिन्गारी अब कलमकार बिक जाते है कोई स्वार्थ साथ आबाद रहा तलवे सत्ता के चाट रहा...
आपकी ये पंक्तियाँ पढ़कर मन में तुरंत उम्मीद की भावना जागती है। आपने अंधेरे के बाद उजाले की बात बहुत सुंदर तरीके से कही। मुझे ऐसा लगा जैसे आप मुश्किल समय में भी हौसला बनाए रखने की बात कर रहे हैं।
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