शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

जब चेतना होती मीरा है


दीप देता  रोशनी  तो 
यामिनी  से  तम घिरा  है 
रेत  बनती है किनारे 
गहराई  बनता हीरा  है 
दुख  देती  जिंदगी  तो 
सुख  देती  जिंदगी 
ईश तो  मिलते  तभी  है 
जब  चेतना  होती  मीरा  है

 

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