शनिवार, 18 अप्रैल 2026

राह से जीवन बना रे



चाह  में  है  राह  रहती 
राह  में  सुन्दर  नजारे
राह  में  मुश्किल  रही  है 
 राह  में  झिलमिल  सितारे 
राह  में  कंकड  है  पत्थर 
 राह  में  सोये  न  थककर 
राह  से  होकर  मिले  हैं  
चोटियां  उत्कर्ष  प्यारे 
राह  कुछ  गाती  रही  है  
राह  तो  साथी  रही  है 
राह  में  अनुभूतियां  है 
 राह  से  जीवन  बना  रे


4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में मंगलवार 21 एप्रिल, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  2. राह कितनी भी हो लंबी, रही तुझे चलना होगा । सरल सहज पंक्तियाँ।

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हँसते हँसते मिट जाते हैं

अब भाव नही होते दर्पण  जो आँखो से दिख जाते है  न रही  चेतना चिन्गारी  अब कलमकार बिक जाते है  कोई स्वार्थ साथ आबाद रहा  तलवे सत्ता के चाट रहा...