गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

शब्द से संसार है

शब्द में रहती  मधुरता, शब्द से संसार है 
शब्द से होता समन्वय ,शब्द से व्यवहार है 

शब्द से संवाद रहता , मन्त्र सद विचार है 
शब्द में शुभकामना है, सद्भावना हर बार है 

शब्द का एक व्याकरण है, आचरण आभार है 
शब्द में ब्रह्माण्ड रहता ,ब्रह्म निर्विकार है 

शब्द से रुबाइयाँ है ,गीत की झंकार है 
शब्दहीन संवेदना है, भावना के तार है 

शब्द भी कुछ जानता है ,अर्थ को पहचानता है 
अर्थ का कुछ मूल्य पा लो ,शब्द ही व्यापार है 


 शब्द में आलोचना है ,व्यंग्य बारम्बार है 
छंद में हर रस भरा है ,काव्य का शृंगार है 

शब्द शक्ति को बचा लो, शब्द ही पतवार  है 
शब्द की सीमाये पा लो ,लेखनी की धार है 


शब्द में ऊंचाइयां है ,गहराईयाँ है भार है 
अर्थ भी मुश्किल रहे है, शब्द से दीवार है 

शब्द से कोई पा रहा है, प्यार की बौछार है 
जा रहा है शब्द से ही, शख्स वह हर बार है

रविवार, 31 जनवरी 2016

मानव सेवा का वन्दन है


सेवा का जिसमे भाव भरा 

करूणा का पाया चन्दन है
करुणा से पाई मानवता 
 मानव सेवा का वन्दन  है

तन दुर्बल होकर मरा मरा
 मन मूर्छित होकर डरा डरा
बचपन ने खोई कोमलता 
 फूटे सपनों के क्रंदन है

लिए  घाव गरीबी  हाथो मे
 बूढी माँ रहती लातो मे
झुग्गी रोती है रातो मे 
सपनों मे रहता नंदन  है 

सुख रहा सदा ही भावो में 
वह तृप्त रहा अभावो में
दुःख महलो में भी पलते है  
होते सुविधा में बंधन है



बुधवार, 13 जनवरी 2016

व्यष्टि और सृष्टि

सृष्टि में समष्टि और
समष्टि में व्यष्टि समाहित है
सृष्टि में जल वायु बच जाए तो सुरक्षित है
व्यष्टि ने समष्टि
समष्टि ने सृष्टि को किया दूषित है
सृष्टि में वृष्टि शीत कही होती है कम
कही होती अपरिमित है
शहर गाँव सड़क खेत
सभी होते आप्लावित है
मिल जाए कही निर्मल जल
स्वच्छ वायु तो लग जाए चित है
निज स्वास्थ्य हमारा मीत है
सृष्टि का आरम्भ है मध्य है
और अंत भी सुनिश्चित है
पर अंत तक चेतना जीवित है
इसलिए हे  व्यष्टि तुम समष्टि के संग
अपनी सृष्टि को बचाओ
सृष्टि रस द्रव्य कण में
परम तत्व को पाओ

सोमवार, 11 जनवरी 2016

शक्ति या सामर्थ्य

शक्ति जहा व्यक्ति का बाह्य बल है
सामर्थ्य वही व्यक्ति की आंतरिक क्षमता है
शक्ति का अर्थ जहाँ यह दर्शाता है
कि कोई व्यक्ति किसी को कितना पीट सकता है
सामर्थ्य यह प्रकट करता है
कि कोई व्यक्ति कितना सह सकता है
शक्ति जहाँ आक्रामकता है
सामर्थ्य वहा सहिष्णुता है
शक्ति करती जहाँ युध्द क्रीड़ा है
सामर्थ्य में रहती भीतर की पीड़ा है
सागर की लहरे उठ कर ऊपर की लहराती है
तूफान के भीतर सुनामी ले आती है
तब वह शक्ति की अभिव्यक्ति करती
प्रलय मचाती है
सामर्थ्य वह है 
जो सागर की गहराई में रहता
विशाल जल राशि को नापता है
पर्वतो की ऊंचाई और विशालता है
जिसकी  विराटता को देख हृदय काँपता है
सामर्थ्य जहा धारण करने की क्षमता है
शक्ति वही मारण का कारण है
सामर्थ्यशाली व्यक्ति की क्षमता
सदा होती असाधारण है
सामर्थ्य आकाश है 
जहाँ कई आकाश गंगाएँ रहा करती है
सामर्थ्य शिव है
जिनकी जटा से माँ गंगा ही नहीं
पसीने से रेवा बहा करती है
सामर्थ्य वह धैर्य है 
जो संकल्प में पला करता है
संकल्प का बल पा 
सामर्थ्य सदा भला करता है
व्यक्ति वही महान है जो सामर्थ्यशाली है
सामर्थ्यवान व्यक्ति की झोली 
कभी नहीं होती खाली है

बुधवार, 30 दिसंबर 2015

जीवन के सरोकार


प्यार में कोई शर्त नहीं होती
आस्था और विश्वास में कोई संशय नहीं होता
ममता करुणा और स्नेह की कोई सीमा नहीं होती
क्षमताये जाग्रत हो जाए तो असीम है
अहंकार के कई रूप है प्रकार है
अहंकार में समाहित रहे समस्त विकार है
अमर ,शाश्वत सनातन रहे विशुध्द विचार है
वैचारिक विरासत सबसे उत्तम है
भौतिक विरासत में पलते कई गम है
संस्कारो की विरासत को जिसने पाया है
जीवन में रही अक्षय ऊर्जा रही कीर्ति की छाया है

युध्द रत हर घाव है

रक्त से लथ पथ हथेली ,पथ फिसलते पाँव है 
श्रम सीकर से है सिंचित ,लक्ष्य की यह छाँव है 

पंथ पर न चिन्ह अंकित, चहुओर बिखरी रेत  है 
नभ पर चिल गिध्द उमड़े, क्षितिज होता श्वेत है 
प्यारा सा बचपन बचा लो ,युध्द रत हर घाव है 

नियति क्यों होती है निर्मम खेलती रही खेल है 
निज रक्त भी होता पिपासु ,परजीवी विष बेल है 
कष्ट में रहता कौशल्य ,अकुशल के भाव है

रविवार, 8 नवंबर 2015

रहो न केवल मौन यहाँ ,ज़िंदा जगती कौम


लोह पुरुष सरदार थे, लोहे सा संकल्प 
 माटी का अभिमान रहा ,अहम भाव न अल्प 
 
होता झगड़ा रोज है, होता रोज बवाल 
कश्मीर से प्रीत करो ,भारत माँ के लाल 

ऐ.के सैतालिस रही, उग्रवाद के हाथ 
उग्रवाद उन्मत्त रहा ,होती जनता अनाथ 


भर भर झोली लेत रहे ,चले चाल पर चाल  
 रहे दोगले देश यहाँ, लंका और नेपाल

जल न जाए देश यहाँ ,क्यों बनते हो मोम 
रहो न केवल मौन यहाँ ,ज़िंदा जगती कौम

दिख रही कहीं आत्मा

खो  गए  तारे  वो  सारे  खो  गया  कहीं  चंद्रमा  दिख  रहे  सुन्दर  नज़ारे  चोटियों  पर  हिम जमा है प्रभा की रश्मियां  ये  प्राची  से  है  झाँ...