सोमवार, 29 अगस्त 2011
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कितना भी आगे
बताओ यहां वन कितना घना है चलो तुम आगे यहां डरना मना है लगे फूल प्यारे और पत्ते जो सारे हरा है अभी तक ये मोटा तना है यहा...
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करुणा और क्रंदन के गीत यहां आए है सिसकती हुई सांसे है रुदन करती मांए है दुल्हन की मेहंदी तक अभी तक सूख न पाई क्षत विक्षत लाशों में अपन...
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