सोमवार, 29 अगस्त 2011

अहसास


(1)
मेरा मन क्यों
उड़ान भरता है ?
बीते हुए लम्हों को
क्यों याद करता है ?
हुई उदास आजकल
सुबह शाम है
तेरा अहसास
सदा मेरे आस-पास रहता है
(2)
वक्त कि टहनी से,
ये कैसे फूल झरे है
दिल मे दर्द अौर
अाॅखो मे अासू भरे है
बडी मुश्किलो से
राहत थी, पायी हमने
सितम इस कदर हुअा कि ,
जख्म हुये हरे है

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