कमजोर सुत्रो पर टिके है, रिश्तो के धागे
अनगिनत कठिनाईया ,इन्सान के अागे
है खोखले विश्वासो पर ,कटती यहाँ पर जिन्दगी
तेरी यादो मे न सोये,रात भर जागे
कच्चे है घर के घरौंदे ,सुख-चैन को त्यागे
दर्द दुख परेशानियो को ,छोडो बढो अागे
जब हौसले हो इस दिल मे अौर सामने हो मंजिले
तिमिर सामाज्य चिरकर ,नव चेतना जागे
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