मंगलवार, 7 जुलाई 2026

देखा दुखियों का क्रंदन है

यह कैसा होता बंधन हैं 
ये होता कैसा नन्दन है 

ये भाव अनोखे भरे भरे 
ये रिश्ते होते खरे खरे 
शब्दों के मोती झरे झरे 
इन आँखो में अभिनन्दन है 
हृदय से निकला वंदन है 

 ये मोर पंख की सुंदरता
 इस नभ से अमृत है बटता 
जीवन से रस न हैं घटता 
यहां समरसता का चंदन  है 
देखा दुखियो का कदन है j

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देखा दुखियों का क्रंदन है

यह कैसा होता बंधन हैं  ये होता कैसा नन्दन है  ये भाव अनोखे भरे भरे  ये रिश्ते होते खरे खरे  शब्दों के मोती झरे झरे  इन आँखो में अभिनन्दन है ...