शुक्रवार, 13 दिसंबर 2024

तू कल को है सीच



जब ज्योति से ज्योत जली
जगता है विश्वास
जीवन में कोई सोच नहीं
वह  करता उपहास

होता है  जो मूढ़ मति 
जाने क्या कर्तव्य
जिसका होता ध्येय नहीं
उसका न गंतव्य

गुजरा पल तो बीत गया
तू कल को है सीच
इस पल में जब ज्योत जली
रोशन है हर चीज

3 टिप्‍पणियां:

पर कुछ न कुछ तो लोच है

  अब  यहां  उत्तर  भटकते  और  खटकती सोच  है  पंख  फैले  पंछीयो  के   दिख  रही  यहां  चोंच  है  अब  हमें  परछाईयों   गहराइयों  को  जानना  है ...