रविवार, 29 दिसंबर 2024

मुख्य हुए अपवाद



परिभाषाएं गौण हुई 
मुख्य हुए अपवाद
जीवन में अब रहा नहीं है
जिव्हा का वह स्वाद

किंतु यंतु हुए प्रभावी
जंतु का उन्माद
ऐसे बिगड़े चाल चलन है 
पल पल रहे विवाद

जीवन में अब कौन कहेगा
 कर लो तुम संवाद 
कही पे खोया अपनापन है 
नहीं मिली कही दाद

आंख भिगोई ममता रोई
  समझे न जज्बात 
बेटी तो अच्छी है निकली
  बेटे दे आघात




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