रविवार, 6 अप्रैल 2025

जपे राम हर पल

दीपक मन की पीर हरे
हर ले असत तिमिर
रोशन वह ईमान करे 
मजबूत करे जमीर

पग पग पर संघर्ष करे
सत्य करे न शोर 
वह मांगे कुछ और नहीं 
मांगे मन की भोर

मन के राजा राम रहे
वे दीन के है बल
यह मन साकेत धाम रहे
जपे राम हर पल







5 टिप्‍पणियां:

पर कुछ न कुछ तो लोच है

  अब  यहां  उत्तर  भटकते  और  खटकती सोच  है  पंख  फैले  पंछीयो  के   दिख  रही  यहां  चोंच  है  अब  हमें  परछाईयों   गहराइयों  को  जानना  है ...