वो अभी तक सींच लिए हैं
साथ में रहता न कोई
हाथ भी तो खींच लिए है
जब खुशी होठों न आयें
नही आंखे मुस्कुराए
हम रहेगे किसलिए है
हम जिएंगे किसलिए है
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
हम जिएंगे किसलिए है
जवाब देंहटाएंवंदन