शनिवार, 4 जुलाई 2026

कहते

होंठ  जिसको  गुनगुनाये 
तो  उसे  हम  गीत  कहते 
ये  हृदय  भूलने  न  पाए 
तो  उसे  हम  मीत कहते 
जो  पुरानी  रुढियों  को 
पीढ़ियों  से  जी  रही  है 
हम  उसे  हैं  प्रीत  कहते
तुम  उसे  है  रीत  कहतें 

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