बुधवार, 9 सितंबर 2026

कामनाएँ है विदेशी

जागती है ये सुबह 
सो गई है रात ऐसी 
पीठ पीछे दोगले है 
सामने बनते हितैषी 
हौसले अब थक चुके हैं 
स्वाद दुख के चख चुके है 
जग यहा होता न अपना 
कामनाए है विदेशी

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