मंगलवार, 29 सितंबर 2026

वो नदी है

नापती खुद को नदी हैं
सौपती खुद को सदी है 

टिमटिमाती रोशनी सी
झोंपड़ी से वो बँधी हैं
मन को भायी वो सुहाई 
वो है नेकी न बदी है 

दिन होती रात होती
किन्तु यंत न यदि है
वो  नदी  है  वो  नदी  है  
हौसलों  से  वो  लदी  है 

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नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है  टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई  वो है नेकी न बदी है  दिन होती रात ह...