रविवार, 15 मार्च 2020

कोरोना वायरस

विश्व कोरोना वायरस के कारण
 शाकाहार की और बढ़ रहा है 
नमस्ते और नमस्कार के माध्यम से 
योगासन कर रहा है 
रोगों के संक्रमण का खतरा 
जब देश पर बढ़ने लगा है 
स्वच्छता आदोंलन का  रंग
 अब और भी अधिक चढ़ने लगा है 
अनियंत्रित जीवन शैली और 
अनुचित आहार विहार का ही तो यह परिणाम है 
एड्स स्वाईन फ्लू कोरोना तो हुए
 मुफ्त में बदनाम है 
यम नियम संयम और स्वदेशी उद्यम से 
नही फैलेगा कोई संक्रमण है 
अधिक मात्रा में आयातित  वस्तुओ से होता
 अर्थ व्यवस्था पर अतिक्रमण है 
अच्छा स्वास्थ्य पाने का 
बस एक यही तरीका है 
सीख लो अच्छे खान पान के गुर
 जीने का बस सही एक सलीका है 
अब छोड़ो कोरोना का रोना 
सब कुछ स्वच्छता से ही तो होना है
सम्यक आहार विहार से 
अपने आचरण को भिगोना है 
पवित्रता और दैवीय गुणो के बल पर 
करो आराधना  महकेगा जीवन का हर कोना है

रविवार, 5 जनवरी 2020

नव संवत्सर मंगलमय हो

नवीन वर्ष में नवीन हर्ष हो 

नई सोच हो नया जोश हो

नई नई आशा और भाषा

 गढ़ी हुई अभिनव परिभाषा

साथ रहे जजबात नए हो 

जीवन मे दिन रात नए हो

नया नया घर का हर कोना

सुख सपनो का रहे बिछौना 

चपल उमंगे नवल तरंगे

कटती लुटती उड़ी पतंगे

नई नई श्रध्दा हो भक्ति

नई नई कविता अभिव्यक्ति

नई साधना नई हो सूक्ति

नव आराधन हो जाये मुक्ति

 नई पवन हो नया गगन हो

उर में रहती नई अगन हो

नई कामना नई लगन हो

जीवन सारा रहा मगन हो

नवीन क्षितिज हो नया सवेरा

नया नया हो सूरज मेरा

नए वर्ष का नया हो फेरा

भाव सुनहरा जग मग चेहरा

प्राची में अरुणाई नव हो

तेज धवल तरुणाई नव हो

नवीन निशा जब गहराई हो

नवल चेतना भर आईं हो

सांझ सुनहरी घिर आई हो

करुणिम मां की परछाईं हो

सजल आंख हो भर आईं हो

नवल वर्ष का नया बसेरा

मधु खग कलरव बाग में डेरा

 तरुवर जलचर सरोवर ठहरा 

चित में चिंतन हो जाए गहरा

पल पल हर पल जीवन लहरा

नवल पताका का ध्वज फहरा

नवल चेतना नवल पिपासा

नही निराशा हर पल आशा

पल पल तोला हर पल माशा

सत के रथ का अभ्युदय हो 

तन मन मे ऊर्जा अक्षय हो

अंतिम जन का अंत्योदय हो

सज्जन की शक्ति संचय हो

रहती करुणा मन निर्भय हो

नव संवत्सर मंगलमय हो


रविवार, 1 सितंबर 2019

सुख सागर का छोर

गण राज्यो से देश बना , गणपति है भगवान  
हर कण में यहां देव रहे ,दिव्य साधना ध्यान



गुणों से ही पूज्य रहे, अवगुण से अपमान 
  गुणित होता चला गया ,गणपति का वरदान

गण नायक ने चित्त हरा , हारा है अभिमान  
जीवन का सौंदर्य रही, इक निश्छल मुस्कान

नायक से नेतृत्व रहा ,गायन  से गुणगान  
मिट्टी के गणराज कहे ,मिट्टी का इंसान
बाधाओ का जोर नही, बढ़े पराक्रम ओर  
साधक को मिल जाएगा ,सुख सागर का  छोर

शनिवार, 6 अप्रैल 2019

भक्ति से उध्दार

जीवन नही कर्म बिना, कर्म शून्यता मौत
त्रिशक्ति जब साथ रहे ,जलती जीवन ज्योत

खुद से भीतर बात करो ,आत्मिक हो संवाद
जप तप से मिट जायेगे ,कैसे भी अवसाद

क्रिया शीलता सदा रही ,जीवन का आधार
शक्ति भक्ति से मिले, चेतन  का संचार

मिली चेतना जीव हिला ,चला गया उस छोर
चंचल नदिया और झरनों में ,शक्ति का है जोर

भीतर जलती ज्योत रही  ऊर्जा सूर्य समान
भक्ति से तो भाग्य जगे , भक्ति भाव प्रधान

गुड़ी पड़वा से शुरू हुआ ,माता का उत्सव
माता दुर्गा नाच रही ,नाच रहे भैरव

शनिवार, 9 मार्च 2019

यहाँ जाग रहा है अणु अणु

यह कंकड़ पत्थर है शंकर 
  हर कण में रहते है विष्णु
  है संतुलन उनके भीतर
  कृष्णा की प्रियतम है वेणु 

  यह प्रीत रीत ही ऐसी है
  भावो से भगवन आये है
  मीरा की भक्ति प्रीत रही  
राधा ने  सचमुच पाये है
  भक्ति की जलती ज्योत रही  
यहाँ जाग रहा है अणु अणु

मंगलवार, 15 जनवरी 2019

खुशियो की शहनाईयां

गहरी गहरी खाईया 
 झीलों की गहराइयां 
  नभ से निकली उतर रही
  कैसी है परछाईया

सुंदरता आनंद
  उड़ती हुई पतंग 
  सबने बाँची नभ में नाची
ठहरी कही  उमंग  
बच्चो  की होती किलकारी
खुशियो की शहनाईयां

कब तक होगी भ्रान्ति  
जीवन हो संक्रांति  
मिल मिल कर के बिछुड़ रही  
जीवन से सुख शांति
  अपनापन था गुजर गया 
  न होगी भरपाईया

कहा गए वो छंद 
जीवन का  मकरन्द 
महकी महकी गंध 
सुरभित से सम्बन्ध 
थर थर काया काँप रही 
खोई कही रजाईयां

मंगलवार, 1 जनवरी 2019

हो नवीन वर्ष पर सोच नई

जीवन के अनुभव अनुपम हो चरणों की रज में चंदन हो
हो नवीन वर्ष भी प्रीत भरा प्यारा सा तुमको वंदन हो
 अविचलित हो मन  भाव भरे प्रतिपग पथ पर हो फूल धरे
रूप हर्षित हो और आकर्षण जीवन खुशिया का नंदन हो 

नित नित लगते हो नव मैले जीवन के नभ पर खग खेले
सिंचित होती हो पौध नई कुदरत से मस्ती हम ले ले
हो नवीन वर्ष पर सोच नई अनुभूति पीड़ा गई गई
तृप्ति भी हर मन को छू ले जो गमगीन थे पल वे भूले

मूक रही वेदना कुछ बोले शोषित भी अपना मुख खोले
जीवन मे हो कुछ आकर्षण शब्दो को हरदम हम तोले
रहती मन में करुणा समता हो नवल वर्ष में पावनता
नित मानवता के हम सींचे बीज अंकुरित हो फुले फले