सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

सखिया करती हास ठिठौली

जिव्हा  खोली कविता बोली 
कानो  में मिश्री  है घोली
जीवन का सूनापन हरती 
भाव  भरी शब्दो की  टोली

प्यार  भरी  भाषाए बोले
जो भी मन में सब कुछ खोले
लगता है इसमें अपनापन 
तट पनघट मुखरित यह हो ले
मादकता छाई है इसमें  
दिवानो कि यह हमजोली

कविता से प्यारा से बंधन 
करुणा से पाया है क्रंदन
वंदन चन्दन नंदन है वन 
सुरभित होता जाता जीवन
हाथो मेहंदी आँगन रोली 
सखिया करती हास ठिठौली 

काव्य सुधा अब क्यों न बरसे 
भाव धरातल नेह को तरसे 
 प्रीत गीत का पीकर प्याला
झुम झुम कर ये मन हरषे
 प्रिय तम मेरी कितनी भोली

 आँख मिचौली करे बड़ बोली

शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

विकृतिया हटाओ

चुनावी घोषणा पत्र से, प्रेमिका के वादे 
नेता के आश्वासन से, प्रेमी के इरादे 
दिल के लिए फैसलो से ,होते चुनाव 
उभरता रहा रिश्तो के ,भीतर एक तनाव 
दाम्पत्यिक जीवन में, वैवाहिक बंधन 
अल्पमत सरकारे ,समझौते गठ बंधन 
तनी हुए तलवारे, और बिखरते रिश्ते  
मजबूरियो के रहते ,अरमान है पिसते 
जीवन एक प्रबंधन ,व्यवस्था बताओ 
जन गण मन गायक हो ,विकृतिया हटाओ

सोमवार, 13 जनवरी 2014

कर्म से पहचान है

कर्म ही पूजा है प्यारे ,कर्म पावन ज्ञान है
कर्म ही किस्मत सँवारे ,कर्म
से पहचान है 

कर्म तुझको है पुकारे ,कर्म ही  बलवान है
कर्म से विमुख हुआ क्यों, कर्म से सम्मान है 

कर्मरत रहता निरोगी ,कर्म से मुस्कान है
कर्म कि तू कर परायण, कर्म ही भगवान् है 

कर्म गीता ने कहा है ,कर्म में सब कुछ रहा है
कर्म में  रहता कन्हैया. कर्म से निर्माण है 

कर्म क्यों न कर रहा है ?कर्म से क्यों डर रहा है ?
कर्म से मिलती है सिध्दि ,कर्म में हनुमान है

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

किस्मत अब तो उन्ही करो में

कड़े सुरक्षा के घेरो में 
रहे निरंतर जो पहरो में 
छुपी हुई है निष्ठुरता तो,
कुर्सी के कुत्सित चेहरो में 

जटिल प्रक्रियाओ में घिरकर 
मिटी योजनाओ कि स्याही 
संवेदना का स्वांग रच रही 
शोषणकारी नौकरशाही 
कैद हो गई है जनता की 
 किस्मत अब तो उन्ही करो में 

धसे हुए है प्रगति पहिये 
बिकी हुई सम्पूर्ण व्यवस्था 
थकी हुई बेहाल जिंदगी 
ढूंढ  रही खुशहाल अवस्था 
समाधान के सूत्र खोजती 
बीत गई आयु शहरो में 

यश वैभव की ऊँची मीनारे
कलमकार को ललचाये 
चाटुकारिता के हाथो में 
राज्य नियंत्रण रह जाए 
सिमट गए सुख के उजियारे
  उनके ही आँगन कमरो में
 

रविवार, 29 दिसंबर 2013

भक्ति में रहता समर्पण

भक्ति में रहता समर्पण और त्याग में संन्यास है 
भावना का यह सरोवर ,नहीं वाक्य का विन्यास है 

रहता निश्छल ह्रदय में ,भाव से अभिभूत है 

आत्मा होती बैरागन ,मन हुआ अवधूत है 
आस्था है चिर सनातन ,भक्त का विश्वास  है 

 जानता है मानता है ,पर कहा वह सुख है 
राधा जी  रूठी हुई है ,हर ख़ुशी में दुःख है 
भक्ति में शक्ति है रहती और प्रेम में उल्लास है 

राम से होती रामायण, श्रीकृष्ण से संगीत है 
प्यार कि हर हार में ही ,होती ह्रदय की जीत है
भाव भी भींगे हुए है पर बुझ  पायी प्यास है

बुधवार, 20 नवंबर 2013

मीलो की दूरिया

मीलो की  दूरिया 
मिलने  कि मजबूरिया  हो सकती है 
दिलो में दूरिया पैदा  नहीं कर सकती 
लम्बे और दीर्घ अवधि के अंतराल 
समय तो तय कर सकते  
आत्मीयता  कम नहीं कर सकते 
दुश्मन कितना भी दुष्ट हो 
उसका प्रहार कितना भी पुष्ट  हो 
संकल्प का बल हिला नहीं सकते 
राहे कितनी भी वीरान हो
  सफ़र में कितनी भी थकान हो 
जीत जाता अंतत साहस है 
मृत्यु के क्षणो में भी व्यक्ति के पास होती 
जीने कि जिजीविषा 
रहती जीवन कि आस है 
जग में कितना भी कोलाहल हो 
बिखरा  कितना भी हलाहल हो 
लग जाता योगी का ध्यान है 
जीवन में कुछ जुड़ता जाए 
अपनी जड़ो से जो जुड़ जाए 
व्यक्ति होता वह महान है


शनिवार, 16 नवंबर 2013

क्या कोई निवारण है ?

मनुष्य और जीव -जंतु में कितना फर्क है 
जीव जंतु अपने आकार और प्रकार से 
तरह तरह की सूचनाये देते है 
सर्प  अपने आकार से डसने कि सूचना 
गिध्द अपने रूप से नोचने कि सूचना देता है 
सिंह अपनी चाल से और भाव भंगिमा से 
आक्रमण कि सूचना देता है 
परन्तु मनुष्य का  दोगलापन 
उसके आचरण का दोहरापन 
कोई सूचना नहीं देता 
 सूचना दिए बिना अचानक अप्रत्याशित आघात करता है 
दुष्ट व्यक्ति अकारण विश्वास घात करता है 
डसता  है  धीमे जहर से पर डसने का कोई कारण नहीं है 
दोगलापन उसे डसने का कारण देता है 
कब नोचेगा ?कितना नोचेगा ?क्यों नोचेगा ?
गिध्द की एक सीमा है 
पशु के साथ उसकी  प्रकृति है 
प्राकृतिक गरिमा है 
पर इंसान ने अपनों को  ही बुरी तरह नोंचा है 
सपनो को तोड़ा है
जख्मो को बार -बार खरोंचा है 
समाज और परिवार में ऐसे कई उदाहरण है 
दोगलेपन का भी क्या कोई निवारण है ?

अर्चना संगीत लय में

वो नही संशय मे  भय में  रहता  वो  तो  हृदय में  वो तिमिर को दीप देता  है समीर का वो प्रणेता  प्राची मे उषा रहा  है  वो रहा सृजन प्रलय में धै...