कहते

होंठ  जिसको  गुनगुनाये  तो  उसे  हम  गीत  कहते  ये  हृदय  भूलने  न  पाए  तो  उसे  हम  मीत कहते  जो  पुरानी  रुढियों  को  पीढ़ियों  से  जी  र...