भक्ति से विरक्ति पैदा होती है
अौर शक्ति जाग्रत होती है
भक्ति से अहंकार से मुक्ति मिलती है
अौेर ईश्वर शरणागती होती है
जो भक्ति व्यक्ति मे विरक्ति के स्थान पर
अासक्ति पैदा करे
अौर ईश्वर शरणागति के स्थान पर
अहंकार उत्पन्न करे
वह भक्ति व्यक्ति के अात्मोत्थान करने के स्थान पर
उसके पतन का कारण होती है
अहंकार शून्य एवम समर्पित भाव तथा कर्म से कि
गई ईश्वर साधना से ईश्वर प्राप्ती सुगमता व शीघ्रता से होती है
रविवार, 2 अक्टूबर 2011
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