कल में बसता हल है
,कल को लेकर चल
जो कल के न साथ चला मिले है अश्रु जल
कल की जिसको चाह नही
वो क्या जाने फल
हर पल सुधरा आज तो
सुधरे कल हर पल
जिसने तिरस्कार सहा किया है विष का पान जीवन के कई अर्थ बुने उसका हो सम्मान कुदरत में है भेद नहीं कुदरत में न छेद कुदरत देती रोज दया कुदर...
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