रविवार, 5 जनवरी 2020
रविवार, 1 सितंबर 2019
सुख सागर का छोर
हर कण में यहां देव रहे ,दिव्य साधना ध्यान
गुणित होता चला गया ,गणपति का वरदान
जीवन का सौंदर्य रही, इक निश्छल मुस्कान
मिट्टी के गणराज कहे ,मिट्टी का इंसान
साधक को मिल जाएगा ,सुख सागर का छोर
शनिवार, 6 अप्रैल 2019
भक्ति से उध्दार
जीवन नही कर्म बिना, कर्म शून्यता मौत
त्रिशक्ति जब साथ रहे ,जलती जीवन ज्योत
खुद से भीतर बात करो ,आत्मिक हो संवाद
जप तप से मिट जायेगे ,कैसे भी अवसाद
क्रिया शीलता सदा रही ,जीवन का आधार
शक्ति भक्ति से मिले, चेतन का संचार
मिली चेतना जीव हिला ,चला गया उस छोर
चंचल नदिया और झरनों में ,शक्ति का है जोर
भीतर जलती ज्योत रही ऊर्जा सूर्य समान
भक्ति से तो भाग्य जगे , भक्ति भाव प्रधान
गुड़ी पड़वा से शुरू हुआ ,माता का उत्सव
माता दुर्गा नाच रही ,नाच रहे भैरव
शनिवार, 9 मार्च 2019
यहाँ जाग रहा है अणु अणु
हर कण में रहते है विष्णु
है संतुलन उनके भीतर
कृष्णा की प्रियतम है वेणु
यह प्रीत रीत ही ऐसी है
भावो से भगवन आये है
मीरा की भक्ति प्रीत रही
राधा ने सचमुच पाये है
भक्ति की जलती ज्योत रही
यहाँ जाग रहा है अणु अणु
मंगलवार, 15 जनवरी 2019
खुशियो की शहनाईयां
झीलों की गहराइयां
नभ से निकली उतर रही
कैसी है परछाईया
उड़ती हुई पतंग
सबने बाँची नभ में नाची
ठहरी कही उमंग
बच्चो की होती किलकारी
खुशियो की शहनाईयां
जीवन हो संक्रांति
मिल मिल कर के बिछुड़ रही
जीवन से सुख शांति
अपनापन था गुजर गया
न होगी भरपाईया
मंगलवार, 1 जनवरी 2019
हो नवीन वर्ष पर सोच नई
गुरुवार, 27 दिसंबर 2018
प्यार
प्यार पूजा है आस्था है अगरबत्ती है
प्यार की अनुभूति रूह तक उतरती है
प्यार उन्माद नही है यौवन का
प्रीति एक प्रतीति है जो टूट नही सकती है
बिखरे हुए राहो पे कांटे उड़ती रही यह धूल है
टूटती रही आशाये है उगते रहे बबूल है
जिंदगी रोने लगी है जब नही हो तुम
अब नही शायद रही है किस्मत में बुलबुल है
वो नदी है
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
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यह कैसा होता बंधन हैं ये होता कैसा नन्दन है ये भाव अनोखे भरे भरे ये रिश्ते होते खरे खरे शब्दों के मोती झरे झरे इन आँखो में अभिनन्दन है ...
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यहाँ शब्द नहीं अनुभूति है अनुभव से सब कुछ पाया है अनुभूति जितनी गहरी हो ठहरी उतनी ही काया है जब घना अँधेरा छाता है चिंतन ...
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जिव्हा खोली कविता बोली कानो में मिश्री है घोली जीवन का सूनापन हरती भाव भरी शब्दो की टोली प्यार भरी भाषाए बोले जो भी मन...
