घौटालो के देश में, एक घौटाला और
खेलो के आयोजन को, तू इसी कड़ी में जोड़
तू इसी कड़ी में जोड़ रे ,जी -स्पेक्ट्रम अनमोल
सरकार बचाने में ,खुल गई है पोल
अन्ना का आव्हान है, हो भ्रष्ट व्यवस्था नष्ट
जोकपाल न बन जाए ,हो लोकपाल स्पष्ट ||1||
कलमाड़ी सुरेश हुए ,डी.राजा के संग
अब तिहाड़ की जेल में ,होगी खूब सत्संग
होगी खूब सत्संग रे, ठग नटवर के साथ
ठग बाजी के खेल में ,सध जायेगे हाथ
कालाधन लाने के लिए ,बाबा की हुंकार
मारीशस के रूट कैसे ,आया धन अपार ||2||
सोमवार, 25 जुलाई 2011
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
युग युग तक जीता है
अंधियारा रह रह कर आंसू को पीता है चलते ही रहना है कहती यह गीता है कर्मों का यह वट है निश्छल है कर्मठ है कर्मों का उजियारा युग युग तक जीता ह...
-
जिव्हा खोली कविता बोली कानो में मिश्री है घोली जीवन का सूनापन हरती भाव भरी शब्दो की टोली प्यार भरी भाषाए बोले जो भी मन...
-
जीवन में खुश रहना रखना मुस्कान सच मुच में कर्मों से होतीं की पहचान हृदय में रख लेना करुणा और पीर करुणा में मानवता होते भग...
-
सम्वेदना का भाव भरा खरा रहा इन्सान जीवित जो आदर्श रखे पूरे हो अरमान जो पीकर मदमस्त हुआ हुआ व्यर्थ बदनाम बाधाएँ हर और खड़ी...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें