वो अभी तक सींच लिए हैं
साथ में रहता न कोई
हाथ भी तो खींच लिए है
जब खुशी होठों न आयें
नही आंखे मुस्कुराए
हम रहेगे किसलिए है
हम जिएंगे किसलिए है
झर गई बारिश से कलियाँ पत्तिया बूँदों ने धोई है यहा अधरों पे खुशियां क्या कर गया श्रृंगार कोई डालियों पर फूल अटके शूल भी आँखों को खटके...