तू अपने घर दीप जला,फैला दे आलोक
हट जाए संत्रास सभी , मिट जायेगा शोक
जीवन का रस कहा गया, कहा गया आनंद
दीपक हर पल देत रहा ,महकी महकी गंध
टिम टिम करता दमक रहा ,तारो से आकाश
एक दीपक जल देत रहा तन मन को विश्वास
जिसने तिरस्कार सहा किया है विष का पान जीवन के कई अर्थ बुने उसका हो सम्मान कुदरत में है भेद नहीं कुदरत में न छेद कुदरत देती रोज दया कुदर...
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