गुरुवार, 29 जून 2023

निकलेगी पीर


         
           दीपक  से  उजियारा 
               बादल से नीर 
          पेड़ों  से  फल  पाओ
              पर्वत  से  धीर 
           भर लेना  साँसों  में 
               थोड़ा  सा  ग़म 
              गूंजेगा  नभ  सारा 
                 निकलेगी  पीर 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

वो नदी है

नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है  टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई  वो है नेकी न बदी है  दिन होती रात ह...