शनिवार, 24 जून 2023

उड़ते तो हौसले है

बेजुबान परिन्दे  है  
बोलते  हुए  घौंसले  है
पंख  तो सिर्फ  फड़फड़ाते 
उड़ते  तो  हौसले  है 
हौसले से  नत मस्तक 
सारी  य़ह  दुनिया  है 
मेहनत  के  बिन  हुए  
वादे  यहा  खोखले  है 

संस्कृति और  संस्कार  की  
चिंताए  जिन्हें  सताती  है 
 तहजीब  यहां बोलने की 
उनको  नहीं  आती  है 


चलती  हुई  जिंदगी  है 
न  छांव  है  न  पानी  है 
निगाहें  फेर ली  जिसने  
उनकी  ही  मेहरबानी  है 

जिंदगी  रोज  नये 
 नंगे  सच  दिखलाती  है 
हौसलों  को  तोड़ती  है  
फिर  मुस्कुराती  है 

सपनों   में  न  सकूँ 
जिसने नहीं  पाया  है 
बेसुरा  सा  राग  है  
जिंदगी  भर गाया है 

अरमान  दिल  से  हमने 
निकाल  कर  फेंके  है 
गिरते  हुए लोगों  के 
अंदाज  गिरे  देखे  है 




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ईश्वर वह ओंकार

जिसने तिरस्कार सहा  किया है विष का पान  जीवन के कई अर्थ बुने  उसका  हो सम्मान कुदरत में है भेद नहीं  कुदरत में न छेद कुदरत देती रोज दया कुदर...