मंगलवार, 4 अगस्त 2026

नर्म कोमल सी हथेली

झर गई बारिश से कलियाँ 
पत्तिया बूँदों  ने धोई 
है यहा अधरों पे खुशियां 
क्या कर गया श्रृंगार कोई 
डालियों  पर फूल अटके 
शूल भी आँखों को खटके 
नर्म कोमल सी हथेली 
टहनियो को यहा चुभोई

2 टिप्‍पणियां:

जीरन का किलेश्वर महादेव

इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की अमर धरोहर मालवा की धरती केवल कृषि, व्यापार और वीरता की भूमि नहीं रही, बल्कि यह भारत की उन प्राचीन सा...