शनिवार, 11 जुलाई 2026

सौन्दर्य नहीं था जीवन में

उनके वो आंसु पोंछ रहा
जिनकी पीडा मे पानी था 
जो दर्द बसा था सीने 
वो दुख की ही राजधानी था 
खाली खाली सा लगता था 
वो हरियाली सा दिखता था 
सौंदर्य नही था जीवन में 
तन मन की होती हानि था 

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