सच मीठी वाणी का कोई मोल नहीं।सुंदर अभिव्यक्ति
थोडी थोड़ी गल रही है थोड़ी थोड़ी जल रही है है पुरानी वेदनाये गीत में जो ढल रही है जो हमारे हित में थीं जो तुम्हारी...
सच मीठी वाणी का कोई मोल नहीं।
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