रविवार, 5 अप्रैल 2020

फैला दे आलोक

तू अपने घर दीप जला,फैला दे आलोक
हट जाए संत्रास सभी , मिट जायेगा शोक
जीवन का रस कहा गया, कहा गया आनंद
दीपक हर पल देत रहा ,महकी महकी गंध
टिम टिम करता दमक रहा ,तारो से आकाश
एक दीपक जल देत रहा तन मन को विश्वास

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

प्रीत और सौंदर्य पर थे वे लगाते बोलीया 
सामने संवेदना के शत्रुओ की टोलिया 
असहाय हो गए थे छल धन बल के समक्ष 
प्रीत के क्या ? प्राण लेगी ये रिवॉल्वर गोलिया 

धन की चाह में फैलाई याचको ने झोलिया 
मन की आहों  ने उठाई अर्थिया और डोलिया 
भीड़ में ही खो गई थी आत्मीयता कही 
अपने लोगो ने जलाई अरमानो की होलिया 

आकाश के उस छोर से है उठती आशा किरण 
हुई आग सी  संकल्पना  बढ़ते  गए उसके चरण 
वह तोड़ती है वर्जना चित्रित हुई हर सर्जना 
लो आ  गई तम  चीरकर हुआ चेतना का संचरण 
 



 

बुधवार, 1 अप्रैल 2020

कह गये नमस्कार

जीवन सारा बदल गया ,बदल गया व्यवहार
राम राम तो कहा नही ,कह गये  नमस्कार
जन जन रहते राम यहाँ, दीन हृदय श्रीराम 
शबरी केवट धाम गये ,राम कर्म निष्काम
आई जब नव रात नई,  हो गए पावन क्षैत्र
कोरोना का रोग मिटे , तिमिर  हटे इस चैत्र
निज हृदय सदभावना , सौम्य हृदय श्रीराम
जन जन तन मन स्वस्थ रहे, सुख के पाये धाम
मर्यादित हो आचरण ,पुरुषोत्तम श्रीराम 
भक्ति निश्छल बनी रहे , शक्ति का सम्मान

रविवार, 29 मार्च 2020

देवी का आव्हान

कोरोना जब साथ रहे , हो जाओ कोरोताईंन
सुरक्षा उपचार रही सेनेटाइजर फाईन
सेनेटाइजर फाईन रही संचित शुचित ज्ञान
एकांतिक रही साधना कर ले जप तप ध्यान
कवि विवेक भी सोच रहा है कैसा है विज्ञान
कोरोना को बांध रहा , देवी का आव्हान

बुधवार, 25 मार्च 2020

मचा है हाहाकार

सस्ता चीनी माल मिला, कोरोना भी साथ
मर मर करके  लौट रहे , लाशो की बारात
लाशो की बारात मिली, हुआ देश कुर्बान
अपने घर मे बने रहो इस युग का आव्हान
कवि विवेक देख रहा है रहा न शाकाहार
अब कुदरत की मार पड़ी मचा है हाहाकार

कोरोना पर दोहे

भीड़ में सबको निगल गया ,कोरोना का दंश 
घर मे बस तुम बने रहो , बच जायेगा वंश 

जनता का कर्फ्यू रहा ,हो जाओ अब शांत
जितने भी थे निपट गये ,पाया है एकांत

अब तक जो भी डरे नही , पहुच गये वे जेल
मल मल करके हाथ धुले ,निकल गया है तेल

जब भी मुश्किल दौर पड़ा ,पहुच गए वो चीन
कोरोना से भाग खड़े , होकर दीन और हीन

जिसका किस पर असर नही कैसा है ये दौर
अमेरिका भी हार गया ,भारत है सिरमौर

 यम नियम से मंत्र जपो नव दुर्गा के साथ
कट जायेगे कष्ट सभी , कोरोना की घात

मंगलवार, 17 मार्च 2020

कोरोना

विश्व कोरोना से लड़ाई  लड़ने का 
दम्भ भर रहा है 
दवाई की कंपनीयो  मुनाफा बढ़ रहा है
 बाकी सभी का शेयर सूचकांक  घट रहा है 
कोरोना का रोना अब सरकारे मीडिया 
और इंश्योरेंस कंपनिया रो रही है 
सेनेटाइजर उत्पादक की हो गई पौ बारह 
नई नई प्रयोगशालाएं खुल रही है
विमानन कंपनियों की हालत 
जो पहले से बिगड़ी हुई है 
अब तो तीर्थो में भी रही न भीड़ 
सिर्फ कोरोना की ही चर्चा  
चेनलो पर छिड़ी हुई है 
बाजार माल और सड़कों का भी हाल 
नही किसी से छुपा  है ।
चीन से आयातित माल का 
स्टॉक भी रुका  है 
बीमारी कोई भी ईलाज नही होने पर 
इंसान की मृत्यु तो होनी ही है
पर कोरोना संक्रमित व्यक्ति  की कलाई 
किसी भी हालात में नही छूनी है 
विदेश जाने का मोह भी अब नही रहा है 
अपने ही गांव में रहो ,मिली साफ हवा 
खेतो में शुध्द जल बहा है 
कोरोना रोगी की पीड़ा 
अब  सही नही जाती है
अकेले ही पड़े रहो ,पड़े पड़े सड़े रहो 
 अब तो आइसोलेशन वार्ड ही साथी है