मंगलवार, 24 नवंबर 2020

गुरु ऊर्जा प्रचण्ड

गुरु चरणों मे धूल नही, गुरु चरणों मे रज
गुरु पिता और मात रहे, गुरु होते अग्रज

गुरु हाथो में फूल नही, होता हर पल दण्ड
गुरु के मानस पुत्र रहे, गुरु ऊर्जा प्रचण्ड

गुरु आस्था में ओज रहा, गुरु दे आशीष रोज
 गुरु शिक्षा और ज्ञान रहे, गुरु होते है खोज

गुरु अंतर्मन ध्यान रहे, गुरु पावन है ज्ञान 
गुरु जी करुणा सींच रहे, हम सिंचित उद्यान

सोमवार, 23 नवंबर 2020

झूठ के है स्कूल

जिनके मन विश्वास नही , वह कैसा आस्तिक
संशय से जो शून्य रहा, ऐसा एक नास्तिक

जगमग जगमग दीप्त रहे ,सच्चाई की आस
अच्छाई में खोट नही , सचमुच का संन्यास

सत के पथ पर शूल मिले ,मिले नही है फूल
झूठ के होते  नाट्य नवीन ,झूठ के है स्कूल

उनका अपना मूल्य रहा, उनके है विश्वास
दृष्टि उनकी बोल रही, वे उनके है खास

उनके अपने तौर तरीके ,अपना है व्यवहार
सुधरा अब न चाल चलन , कैसे करे सुधार

रविवार, 22 नवंबर 2020

मूर्ख बने विद्वान

खट्टे मीठे स्वाद रहे ,खट्टे मीठे बैर 
खतरे में सम्वाद रहे ,अपने होते गैर

बस्ता और स्कूल रहा, बच्चा है गणवेश 
शिक्षा रोटी भूख हुई, शिक्षक है उपदेश

हर घर मे दुकान हुई , शिक्षा कारोबार
जितने स्कूल रोज खुले, उतना बंटाधार

शिक्षा भी बदनाम हुई , शिक्षित बेरोजगार
अपने हक को मांग रहे, खेती न व्यापार

पुस्तक कूड़ेदान मिली, ज्ञान हुआ गुमनाम
ज्ञानी जन तो मूर्ख हूए, मूर्ख बने विद्वान

शनिवार, 21 नवंबर 2020

रहा झूठ पर जोर

कथनी करनी भिन्न रही , रहा झूठ पर जोर
बाहर से कुछ और रहे, भीतर से कुछ और

बदले उनके भाव रहे , बदले है तेवर
घर पर जब है रेड डली , कितने है जेवर

जितना उठता भाव रहा, उतना ऊँचा मूल्य
सस्ती केवल जान रही , मानव पशु समतुल्य

सीता में है सत्य रहा, सत्य पथिक है राम
सच्चाई का कोई नही , केवल है हनुमान

गुरुवार, 19 नवंबर 2020

यादे रोशनदान

यादे घर का द्वार रही ,यादे रोशनदान
यादो में से झांक रहे खेत गाँव खलिहान

यादे छुक छुक रेल रही , यादे नैरोगेज
यादो में है कैद रही , बाबू जी की मेज

यादो में चल चित्र रहे , याद रहे कुछ मित्र
यादो में है महक रहे, खुशबू चन्दन इत्र

यादो में गुलजार रहा , अपनापन और प्यार
यादो में है दाद मिली , कविता का संसार

बुधवार, 18 नवंबर 2020

करना विषपान

मन्दिर में मूर्ति है
 मूर्ति में प्राण
प्राणों के भीतर तुम
 भर लो मुस्कान

मीरा और सूर ने भी 
छेड़ी थी तान
कान्हा की भक्ति है
 राधा गुमनाम

मन कितना मैला है
 मैला इन्सान
मैले में खेला है
 पप्पू शैतान

धन कितना तुम पा लो
पर गम को सम्हालो
 प्याले में हाला है 
करना विषपान

तुमने जो पाया है 
सब कुछ वह गाया है
काया ही माया है 
जीवन वरदान

शनिवार, 14 नवंबर 2020

क्या करता एक दीप

जग में तम घन घोर रहा, क्या करता एक दीप
जो मर कर भी अमर हुआ , उसका आँगन लीप

महके दीप उजियार यहाँ, चहके खग कलरव
बारूद में मत आग लगा, दीप उत्सव अभिनव

महका हर घर द्वार रहा , चहके खग दल व्योम
दीपोत्सव का सार यही, हो पुलकित हर रोम

जगमग जगमग दीप्त हुआ , दीपो का त्यौहार
दीपो की बारात चली , डोली लिये कहार

नर्म कोमल सी हथेली

झर गई बारिश से कलियाँ  पत्तिया बूँदों  ने धोई  है यहा अधरों पे खुशियां  क्या कर गया श्रृंगार कोई  डालियों  पर फूल अटके  शूल भी आँखों को खटके...