कर इसका सम्मान
श्रम के पथ से पायेगा
मंजिल और अरमान
श्रम से सब भ्रम दूर रहे
श्रम से मिले शिखर
जीवन मे सब साध्य रहे
श्रम से जाये निखर
जीवन कोई उद्देश्य नहीं
बस खुद की परवाह
राहों में है भटक रहा
वहीं रहा गुमराह
इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की अमर धरोहर मालवा की धरती केवल कृषि, व्यापार और वीरता की भूमि नहीं रही, बल्कि यह भारत की उन प्राचीन सा...
सुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर रचना
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