Srijan
शनिवार, 26 अक्टूबर 2024
वहीं रहा गुमराह
होठों पर मुस्कान रखो
मन मे शुध्द विचार
मिट जायेगे दोष सभी
मिटेगा व्याभिचार
जीवन का वरदान मिला
कर इसका सम्मान
श्रम के पथ से पायेगा
मंजिल और अरमान
श्रम से सब भ्रम दूर रहे
श्रम से मिले शिखर
जीवन मे सब साध्य रहे
श्रम से जाये निखर
जीवन कोई उद्देश्य नहीं
बस खुद की परवाह
राहों में है भटक रहा
वहीं रहा गुमराह
2 टिप्पणियां:
सुशील कुमार जोशी
28 अक्टूबर 2024 को 10:04 pm बजे
सुन्दर
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हरीश कुमार
30 अक्टूबर 2024 को 9:33 pm बजे
बहुत सुंदर रचना
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वेदना ने कुछ कहा है
सुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर रचना
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