ज़िंदगी गाती नही है
गीत कोई मर रहा हैं
गीत का साथी नही है
है अधूरे और पुराने
गीत हृदय में लिखे है
पंखुड़ी से प्रीत करते
भ्रमर भी गुंजित दिखे है
वो नही होती है कविता
जो होंठ पर आती नही है
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 05 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंसुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर जीवन लय
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