सोमवार, 28 जून 2021

मिले चोर ही चोर


धन से कोई धनी हुुुआ, बल से है बलवान
तू अपने सत्कर्मो से , खुद को बना महान

धन नही सुखी हुआ, दुख सुविधा के संग 
दुविधा में भी सुखी रहे , उसके संग उमंग

जब भी उनके होठ रही , प्यारी सी मुस्कान 
प्यारी प्यारी रही जिंदगी, हर मुश्किल आसान

जीना तो मुश्किल हुआ, मरना है आसान
जी जी करके रोज मरा , दुनिया मे इन्सान

अपनो से वे छले गये, मिले चोर ही चोर
आँसू थे जो सूख गये, ऐसा कैसा दौर

उनकी अपनी सोच रही , उनके रहे विचार 
तू ही अपना भाग्य बना, कर सपने साकार

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कोई चीन चीज

चीनी से हम छले गये ,घटना है प्राचीन ची ची करके चले गए, नेता जी फिर चीन सीमा पर है देश लड़ा ,किच किच होती रोज हम करते व्यापार रहे, पलती उनकी फ...