जीवन मे मकरन्द नही
कहा गये वो शौक
सृजन से तू स्वर्ग बना
कोरोना को रोक
चिड़िया रानी लुप्त हुई
चहकी न कोयल
फल के मिलते पेड़ नही
फूटी नही कोपल
उड़ते खग नभ संग रहे
करते रहे विचार
नभ तक क्यो विस्तीर्ण हुए
ये बिजली के तार
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
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