ऊंचाई में शिफ्ट हुये ,लिफ्ट हुए अरमान
रिश्ते थे जो बिके नही, हे मेरे सरकार
दिल से दिल तक जुड़े रहे, अंतर्मन के तार
बहरे होकर मौन हुए, रहे स्वार्थ के भाव
गहराई की और चलो, गहरा हो स्वभाव
अंधियारा रह रह कर आंसू को पीता है चलते ही रहना है कहती यह गीता है कर्मों का यह वट है निश्छल है कर्मठ है कर्मों का उजियारा युग युग तक जीता ह...
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