ऊंचाई में शिफ्ट हुये ,लिफ्ट हुए अरमान
रिश्ते थे जो बिके नही, हे मेरे सरकार
दिल से दिल तक जुड़े रहे, अंतर्मन के तार
बहरे होकर मौन हुए, रहे स्वार्थ के भाव
गहराई की और चलो, गहरा हो स्वभाव
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें