शुक्रवार, 7 मार्च 2025

दीपक से ले बल


औरों से वे पूछ रहे 
कहा है अपना गेह
भूले भोले भाव यहां 
भूल गए है स्नेह

हर पल ही तुम खुश रहो 
चाहे जो हो हाल
जीवन से सब कष्ट मिटे
सुलझे सभी सवाल

जीवन में जो दुख रहा 
उसका भी है हल 
दीपक सी तू ज्योत जला
दीपक से ले बल

अब तक दुर्दिन गए नहीं
होता  रहा बवाल
षड्यंत्रों की भेट चढ़े
अपने सभी सवाल




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