कुल्हड़ की
वह चाय नहीं है
मैथी का न साग
चूल्हे में
वह आग नहीं
कंडे की न राख
माटी की सुगन्ध
है बिछड़ी
कहा गई वह
प्यारी खिचड़ी
जितने भी थे
रिश्ते बिखरेलगे स्वार्थ के दाग
प्रेम के मन्दिर न मिलते . न प्रेम की मस्जिद है प्रेम मुश्किल से मिला है, प्रेम मन का मीत है प्रेम से मुस्काया मौसम ,प्...