मंत्रों से कब मोक्ष मिला
शब्दों से कब छंद
संवेदना जब साथ रही
अदभुत हुए प्रबंध
सुन लो समझो जान लो
शब्दों के भावार्थ
जिसने सीखा जिया वही
जीवन का यथार्थ
अंधियारा रह रह कर आंसू को पीता है चलते ही रहना है कहती यह गीता है कर्मों का यह वट है निश्छल है कर्मठ है कर्मों का उजियारा युग युग तक जीता ह...
सुंदर भावार्थ !
जवाब देंहटाएंDhanyawad
हटाएंबहुत सुंदर
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