किया जाए अन्त
स्नेह सद्भावना को
करे हम जीवन्त
टूट गई आशाओं को
एक विश्वास देकर
नई सम्भावना का
ले आए वसन्त
खुली हुई खिड़की
खुला हुआ नभ है
लिखी नव इबारत
जीवन तेरा तब है
कही दिखते पलकों पे
करुणा के आंसू
ऊंची हुईं मीनारें
नहीं दिखता रब है
थोडी थोड़ी गल रही है थोड़ी थोड़ी जल रही है है पुरानी वेदनाये गीत में जो ढल रही है जो हमारे हित में थीं जो तुम्हारी...
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