Srijan
रविवार, 9 फ़रवरी 2025
कहा हम तलाशे
वहीं रही करवट
वहीं रही सांसे
अपनो के सपनों को
कहा हम तलाशे
है मंदिर के अब तक
खुले नहीं पट है
तीर्थों पे प्रवचन
कथा में तमाशे
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पर कभी चीखता नहीं है
आई याद मां की
अपनो को पाए है
करुणा और क्रंदन के गीत यहां आए है सिसकती हुई सांसे है रुदन करती मांए है दुल्हन की मेहंदी तक अभी तक सूख न पाई क्षत विक्षत लाशों में अपन...
वेदना ने कुछ कहा है
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