वहीं रही सांसे
अपनो के सपनों को
कहा हम तलाशे
है मंदिर के अब तक
खुले नहीं पट है
तीर्थों पे प्रवचन
कथा में तमाशे
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
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