Srijan
बुधवार, 12 फ़रवरी 2025
पानी
पागल और प्रेमी है घायल है पानी
हुआ दिल जला तो बादल है पानी
नदी बन चला तो ताजा है पानी
बना जब समन्दर तो खारा है पानी
आंखों के अन्दर है भावों का पानी
मिले नहीं मिलता अभावों का पानी
कही एक बूंद भी मिलती नहीं है
मरुथल में मिलता है मुश्किल से पानी
1 टिप्पणी:
सुशील कुमार जोशी
14 फ़रवरी 2025 को 8:38 pm बजे
सुन्दर
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