जीवन है नदी का
बहना है आया
किनारों से उसने
साथ लम्बा निभाया
गति में रही वह
तो बोली है कल छल
गहरी हुई वह
तो उथला जल पाया
समंदर से जीवन
जीना है सीखो
लहरों के संग संग
रहना है सीखो
कठिन कुछ पल
ज्वार भाटे के जैसे
उन्हीं मुश्किलों में
तुम इतिहास लिखो
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
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