बुधवार, 7 अक्तूबर 2020

वह कोरा है झूठ

दिखता नही सत्य सनातन ,दिखते केवल ठूठ
तू जिसको है जान रहा ,वह कोरा है झूठ

सत्कर्मो से स्वर्ग मिलेगा ,कर ले अच्छे काम
मृत्यु तो है सत्य सनातन, जीवन है संग्राम

नैतिकता तो चली गई, अब नैतिक है पाठ
उपदेशो में रही सादगी ,महाराजा से ठाट

विचलित होता चित्त रहा, चिंतित है महाराज
छुप कर बैठे पाप कर्म है ,गहरे गहरे राज

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 08 अक्टूबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. नैतिकता तो चली गई, अब नैतिक है पाठ
    उपदेशो में रही सादगी ,महाराजा से ठाट

    –सत्य

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